news24hub.in

31 दिन से जारी हमले: ईरान को लेकर बातचीत की खबरें, ट्रंप ने जताई तेल पर कब्ज़े की इच्छा

ईरान पर अमेरिका-इज़रायल के हमलों का 31वां दिन आते-आते संघर्ष और भी तेज़ और व्यापक हो गया है। खाड़ी देशों तक हिंसा फैलने के बीच कुवैत में एक भारतीय नागरिक की मौत की खबर सामने आई है। वहीं, ट्रंप के तेल पर कब्ज़े को लेकर दिए गए बयान ने विवाद को और भड़का दिया है। इस बीच, युद्ध का असर भारत में भी दिखने लगा है, जहां ईंधन संकट के चलते घरेलू जरूरतों के लिए केरोसीन की अस्थायी वापसी की गई है।

नई दिल्ली: ईरान पर अमेरिका-इज़रायल के हमलों से शुरू हुआ युद्ध सोमवार (30 मार्च) को 31वें दिन में पहुंच गया है। इस दौरान संघर्ष का दायरा लगातार बढ़ रहा है और ईरान जवाबी हमलों में खाड़ी देशों को भी निशाना बना रहा है। कुवैत में भारतीय दूतावास ने पुष्टि की है कि 29 मार्च को समुद्री पानी को मीठा बनाने वाले एक संयंत्र पर हुए हमले में एक भारतीय नागरिक की जान चली गई। दूतावास ने शोक जताते हुए बताया कि वह कुवैती प्रशासन के संपर्क में है और प्रभावित परिवार को हर संभव सहायता प्रदान की जा रही है।

ईरान के तेल पर नियंत्रण चाहता हूं: ट्रंप

ब्रिटिश अखबार ‘फाइनेंशियल टाइम्स’ को दिए एक इंटरव्यू में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उनकी प्राथमिकता ईरान के तेल पर नियंत्रण हासिल करना है। उन्होंने कहा, “सच कहूं तो, मैं ईरान के तेल पर कब्जा करना पसंद करूंगा। लेकिन अमेरिका में कुछ लोग इस पर सवाल उठाते हैं, जो मेरी नजर में समझदारी नहीं रखते।” वहीं दूसरी ओर, ट्रंप ईरान के साथ बातचीत जारी होने का भी दावा कर रहे हैं। उनका कहना है कि अमेरिका, ईरान से सीधे और अप्रत्यक्ष दोनों माध्यमों से संवाद कर रहा है। हालांकि, ईरान ने इस तरह की किसी भी बातचीत से साफ इनकार किया है और अमेरिका पर जमीनी हमले की तैयारी करने का आरोप लगाया है। ट्रंप के बयानों में विरोधाभास भी नजर आया—एक तरफ उन्होंने बातचीत में प्रगति की बात कही, तो दूसरी ओर यह भी कहा कि “हम बातचीत करते हैं और फिर हालात ऐसे बनते हैं कि हमें उन्हें बम से निशाना बनाना पड़ता है।”

खार्ग द्वीप पर नियंत्रण के संकेत

‘फाइनेंशियल टाइम्स’ को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने ईरान के अहम तेल टर्मिनल खार्ग द्वीप पर कब्ज़े की संभावना का भी इशारा किया। उन्होंने कहा, “संभव है हम इसे अपने नियंत्रण में लें, और यह भी हो सकता है कि न लें,” साथ ही यह भी स्वीकार किया कि ऐसा कदम उठाने पर अमेरिकी सेना को वहां लंबे समय तक तैनात रहना पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि खार्ग द्वीप पर कब्ज़ा करना और उसे बनाए रखना आसान नहीं होगा, क्योंकि यह ईरान की मुख्य भूमि से दागी जाने वाली मिसाइलों और तोपखाने की मारक सीमा के भीतर आता है।

इज़रायल-लेबनान सीमा पर बढ़ता तनाव

इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दक्षिणी लेबनान में सैन्य अभियान तेज़ करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि “बफर ज़ोन का विस्तार किया जाएगा,” और इसके पीछे हिज़्बुल्लाह की तरफ से हो रहे लगातार रॉकेट हमलों को वजह बताया। लेबनान के अधिकारियों के मुताबिक, अब तक 1,200 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है और 10 लाख से अधिक लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं। वहीं, इस संघर्ष में पांच इज़रायली सैनिकों के मारे जाने की भी पुष्टि हुई है।

विभिन्न मोर्चों पर अब तक बड़ी संख्या में जानें गई हैं:

ईरान में 1,900 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।
इज़रायल में 19 लोगों ने अपनी जान गंवाई है।
इराक में 80 सुरक्षाकर्मी मारे गए हैं।
खाड़ी देशों में 20 लोगों की मौत दर्ज की गई है।
वेस्ट बैंक में 4 लोगों के मारे जाने की खबर है।
इसके अलावा, 13 अमेरिकी सैनिकों की भी मौत हुई है।

यह भी पढ़ें” ईरान ने Donald Trump से युद्ध का मुआवजा मांगा है।

जमीनी युद्ध की आशंका और बढ़ती बयानबाज़ी

ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर क़ालिबाफ़ ने कहा है कि उनकी सेना “अमेरिकी जमीनी सैनिकों का इंतज़ार कर रही है, ताकि उन्हें करारा जवाब दिया जा सके।” वहीं दूसरी ओर, ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिकी सेना उसके क्षेत्र में प्रवेश करती है, तो वह फारस की खाड़ी में बारूदी सुरंगें बिछा सकता है और खाड़ी देशों में जमीनी हमले भी तेज़ कर सकता है।

तेल संकट गहराया, वैश्विक असर तेज़

इस संघर्ष का प्रभाव अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर भी साफ नजर आ रहा है। ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 115 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है, जो 28 फरवरी को हमलों की शुरुआत के बाद से लगभग 60 प्रतिशत की बढ़ोतरी को दर्शाती है। फारस की खाड़ी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ पर ईरान की मजबूत पकड़ ने वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। दुनिया में होने वाले कुल तेल परिवहन का करीब पांचवां हिस्सा इसी अहम मार्ग से होकर गुजरता है।

बातचीत की पहल, लेकिन अनिश्चितता बरकरार

अमेरिका ने ईरान के सामने 15 बिंदुओं का एक प्रस्ताव पेश किया है, जिसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ को जहाज़ों की आवाजाही के लिए खोलने की मांग भी शामिल है। वहीं, ईरान ने इसके जवाब में अपनी पांच शर्तें रखी हैं, जिनमें इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर अपनी संप्रभुता बनाए रखना सबसे अहम है। दूसरी ओर, पाकिस्तान ने कहा है कि वह आने वाले समय में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की मेज़बानी करेगा। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि यह बातचीत सीधे होगी या परोक्ष तरीके से आयोजित की जाएगी।

कूटनीतिक पहल: पाकिस्तान की मेज़बानी, अनिश्चितता जारी

इसी बीच, पाकिस्तान ने 29 मार्च को ऐलान किया कि वह जल्द ही अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की मेज़बानी करेगा। विदेश मंत्री इशाक डार के अनुसार, दोनों देशों ने पाकिस्तान पर भरोसा जताया है और आने वाले दिनों में “सार्थक वार्ता” की कोशिश की जाएगी। इस्लामाबाद में तुर्किये, मिस्र और सऊदी अरब के विदेश मंत्रियों की बैठक में भी इस संघर्ष के आर्थिक और वैश्विक प्रभाव—खासकर सप्लाई चेन, खाद्य सुरक्षा और ऊर्जा कीमतों—को लेकर चिंता जताई गई।

हालांकि, प्रस्तावित बातचीत किस रूप में होगी, यह अब तक स्पष्ट नहीं है—सीधी होगी या परोक्ष। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वार्ता में प्रगति का दावा जरूर किया है, लेकिन पाकिस्तान में संभावित बातचीत पर उन्होंने सीधे तौर पर कुछ नहीं कहा। वहीं, ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर क़ालिबाफ़ ने इन प्रयासों को “एक ओट” करार देते हुए खारिज कर दिया और आरोप लगाया कि इसके साथ ही क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी भी बढ़ाई जा रही है। पाकिस्तान की इस सक्रियता को लेकर भारत के रणनीतिक हलकों में चिंता देखने को मिल रही है। विश्लेषकों का मानना है कि यह स्थिति दिखाती है कि इस्लामाबाद अब भी बड़े भू-राजनीतिक मुद्दों में अपनी भूमिका निभाने की क्षमता रखता है, जो भारत की पाकिस्तान को कूटनीतिक रूप से अलग-थलग करने की नीति पर सवाल खड़े करता है।

“यह भी पढ़ें” ईरान का तीखा बयान – आने दो, जिंदा नहीं छोड़ेंगे; अमेरिका अब भी चुप, क्या हालात बदल गए?

भारत पर असर: रसोई गैस दबाव के बीच केरोसीन की अस्थायी वापसी

इस युद्ध का प्रभाव भारत में भी नजर आने लगा है। केंद्र सरकार ने घरेलू जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के जरिए केरोसीन का अस्थायी आवंटन करने का निर्णय लिया है। यह करीब 60 दिनों के लिए उठाया गया आपात कदम है, जिसका उद्देश्य एलपीजी (रसोई गैस) पर बढ़ते बोझ को कम करना है। सरकारी निर्देशों के मुताबिक, केरोसीन का इस्तेमाल खाना बनाने के साथ-साथ रोशनी के लिए भी किया जाएगा। इसके तहत उन 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी पीडीएस केरोसीन की आपूर्ति अस्थायी रूप से फिर शुरू की जा रही है, जिन्हें पहले ‘केरोसीन मुक्त’ घोषित किया गया था। यह फैसला इस बात का संकेत है कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ रहे दबाव और कीमतों में तेज़ बढ़ोतरी के बीच सरकार देश में ईंधन की उपलब्धता बनाए रखने के लिए वैकल्पिक उपाय अपना रही है।

Exit mobile version