ईरान और इजरायल के बीच जारी संघर्ष अब पहले से कहीं ज्यादा गंभीर होता जा रहा है। अमेरिका ने शुरुआत में इस युद्ध को जितना हल्का समझा था, हालात अब उससे कहीं ज्यादा खतरनाक रूप ले चुके हैं। स्थिति यह बन गई है कि अमेरिका जिस ईरान की मिसाइलों के खत्म होने का इंतजार कर रहा था, वे अभी भी लगातार दागी जा रही हैं। वहीं दूसरी ओर इजरायल के इंटरसेप्टर तेजी से कम होते जा रहे हैं, जो इन मिसाइलों से देश की रक्षा के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। ऐसे में क्षेत्र में तनाव और भी बढ़ता दिखाई दे रहा है।

Iran-Israel War News:
इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष अब काफी तीव्र हो गया है। दोनों देश एक-दूसरे पर लगातार गोले और मिसाइलें दाग रहे हैं। इस बीच एक नई चिंता सामने आई है। इजरायली अधिकारियों के हवाले से अमेरिकी अधिकारियों ने बताया है कि इजरायल के पास बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने वाले इंटरसेप्टर तेजी से कम होते जा रहे हैं। यह जानकारी अमेरिकी अधिकारियों ने मीडिया रिपोर्ट्स के जरिए साझा की है। इसके बाद सवाल उठने लगे हैं कि इस युद्ध में अमेरिका और इजरायल मिलकर जिस ईरान को कमजोर समझ रहे थे, क्या वह उतना कमजोर नहीं है या फिर दोनों देशों की रणनीति ही गलत साबित हो रही है।
Semafor की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के एक अधिकारी ने बताया कि जब इजरायल इस युद्ध में शामिल हुआ था, तब भी उसके पास इंटरसेप्टर मिसाइलों की संख्या पहले से ही सीमित थी। दरअसल, पिछले साल ईरान के साथ हुए टकराव के दौरान इन इंटरसेप्टर का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा चुका था।
अब मौजूदा हालात में ईरान लगातार मिसाइल हमले कर रहा है, जिससे इजरायल की लंबी दूरी की रक्षा प्रणाली पर भारी दबाव बन गया है। वहीं मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी कहा जा रहा है कि ईरान अपनी कुछ मिसाइलों में क्लस्टर म्यूनिशन का इस्तेमाल भी करने लगा है, जिससे स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो गई है।
क्लस्टर म्यूनिशन की वजह से एक ही मिसाइल से कई छोटे-छोटे बम गिरते हैं, जिन्हें एक साथ रोकना इजरायल की रक्षा प्रणाली के लिए और ज्यादा मुश्किल हो जाता है।
अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि अमेरिका को कई महीनों पहले से अंदाजा था कि इज़राइल के पास इंटरसेप्टर मिसाइलों की कमी हो सकती है। उन्होंने कहा कि अमेरिका इस संभावना से पहले ही अवगत था और उसी के अनुसार तैयारी भी कर चुका था।
अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल अमेरिका के अपने इंटरसेप्टर हथियारों की कोई कमी नहीं है और उसकी सैन्य ताकत अभी भी मजबूत स्थिति में है। हालांकि यह अभी साफ नहीं है कि अमेरिका अपने इंटरसेप्टर इज़राइल को देगा या नहीं।
उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका इज़राइल को इंटरसेप्टर उपलब्ध कराता है, तो इससे उसके अपने भंडार पर भी कुछ दबाव पड़ सकता है।
अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, अमेरिका के पास क्षेत्र में मौजूद अपने सैन्य ठिकानों और तैनात सैनिकों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त हथियार और संसाधन मौजूद हैं। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि इज़राइल इस कमी को दूर करने के लिए अन्य विकल्पों और उपायों की तलाश कर रहा है।

ईरान की मिसाइलें कैसे इजरायल के लिए चुनौती बन रही हैं?
- ईरान ने अब ऐसे हथियारों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है जो इज़रायल की आयरन डोम रक्षा प्रणाली को चुनौती दे रहे हैं और उसे नुकसान पहुँचा रहे हैं। इन हथियारों को क्लस्टर बम कहा जाता है। क्लस्टर बम दरअसल ऐसी मिसाइल होती है जिसके भीतर सैकड़ों छोटे-छोटे बम भरे होते हैं। जब यह मिसाइल हवा में फटती है तो ये छोटे बम बड़े इलाके में फैल जाते हैं और जमीन पर गिरकर तबाही मचाते हैं। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के माहौल में यही हथियार अब इज़रायल के लिए सबसे बड़ी चिंता का कारण बनते जा रहे हैं।
2. प्रत्येक छोटे बम में लगभग 5 किलोग्राम तक विस्फोटक होता है। सामान्य तौर पर एक मिसाइल में करीब 24 छोटे बम होते हैं, जबकि ईरान की खोर्रमशहर मिसाइल में इनकी संख्या बढ़कर लगभग 80 तक पहुंच सकती है।
3. ऐसे हमलों में ये बम लगभग 8 से 10 किलोमीटर तक के बड़े इलाके में फैलकर गिर सकते हैं। इनका कोई निश्चित लक्ष्य नहीं होता, इसलिए ये रिहायशी इलाकों, सड़कों, पार्कों और व्यापारिक क्षेत्रों में भी गिर सकते हैं। इज़रायल में बैलिस्टिक मिसाइल हमलों से पहले लोगों को सतर्क करने के लिए सायरन बजा दिए जाते हैं, लेकिन इसके बावजूद खतरा पूरी तरह खत्म नहीं होता।

ईरान के हमलों से इजरायल कैसे खुद को बचाएगा?
- इज़राइल के पास मिसाइल हमलों से बचाव के लिए कई और तरीके भी मौजूद हैं। वह लड़ाकू विमानों की मदद से भी दुश्मन के हमलों को रोकने की कोशिश कर सकता है, लेकिन लंबी दूरी की मिसाइलों को रोकने के लिए इंटरसेप्टर को सबसे प्रभावी हथियार माना जाता है। इज़राइल का आयरन डोम सिस्टम मुख्य रूप से कम दूरी से आने वाली मिसाइलों को रोकने के लिए तैयार किया गया है।
2. इसी दौरान अमेरिका ने इज़रायल को लगभग 12,000 बम बेचने की अनुमति दे दी है। इस समझौते को आपात स्थिति का हवाला देते हुए अमेरिकी प्रशासन ने कांग्रेस की मंजूरी लिए बिना ही मंजूर कर दिया।
3. रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल जून में ईरान के साथ 12 दिन तक चले संघर्ष के दौरान अमेरिका ने 150 से अधिक THAAD इंटरसेप्टर का इस्तेमाल किया था। उस समय यह संख्या उसके कुल भंडार के लगभग एक चौथाई के बराबर मानी जा रही थी। इसके अलावा मौजूदा युद्ध के शुरुआती पांच दिनों में अमेरिका ने करीब 2.4 अरब डॉलर के पैट्रियट इंटरसेप्टर भी दागे थे।
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